चिविंगम खाना हानिकारक या दाँतों मसूड़ों के लिए अच्छा ?
च्विंगम खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा या बुरा - मिथक व् उसके प्रभाव
च्विंगम खाने को लेकर बहुत से मिथक हैं जिनमें से कुछ अच्छे रिजल्ट के लिए बनाये गये हैं व् कुछ ऐसे ही बन गए हैं
मिथकों की दुनिआ : नकारात्मक व् सकारात्मक
१- च्विंगम खाने से पेट में दर्द हो जायेगा

प्रभाव :यदि आपने जरुरत से ज्यादा च्विंगम खा लिया है और उसको अपनी आंतों में पंहुचा दिया है तो-हाँ -आपको पेट दर्द होने की पूरी संभावना है. च्विंगम को वैसे भी मुँह के स्वाद व् बदबू को दूर करने के लिए चबाया जाता है और फिर बाहर फेंक दिया जाता है. च्विंगम को अपनी आंतों में नहीं ले जाना चाहिए
च्विंगम में जो पदार्थ मिलाये जाते हैं वे साधारणतया सीधे नहीं खाये जाते जैसे रेसिन, ह्यूमेक्टेंट्स (वे पदार्थ जो किसी भी चीज़ को आद्रक (Moist ) बनाये रखता है), एलास्टोमर्स, वैक्स या मोम, एमुल्सिफिएर, सॉफ्टनर्स, मीठा या शुगर और खुशबू। ये पदार्थ यदि अधिक मात्रा में खा लिया जाए तो पेट की परेशानी बढ़ सकती है.
दुनिया भर ने च्विंगम का सालाना 28 .6 बिलियन डॉलर का बाजार है, हर ब्रांड अपने प्रोडक्ट्स की सेल बढ़ाने के लिए तरह तरह के स्लोगन बना कर अपने सामान की एक खास इमेज अपने ग्राहकों के दिमाग में डालने में लगे रहते है.इसके लिए कुछ मिथ भी बनाते है जो उनके प्रोडक्ट्स की सेल बढ़ाने में मदद करते हैं नकारात्मक मिथक समाज में खुद बन जाते हैं जबकि सकात्मक मिथक, च्विंगम बनाने वाली कम्पनियाँ बनती हैं जिससे उनकी सेल बढ़ सके.
२. च्विंगम रबर से बनाया जाता है इसलिए स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है या ये खाने की चीज नहीं है.
प्रभाव -सही है, इसमें पड़ने वाले पदार्थ किसी भी तरह से,इंसानों की फ़ूड चेन के हिस्से नहीं हैं, पर यदि कम मात्रा में लिया जाए तो मुँह के स्वाद व् खुसबू को देर तक बनाए रखने में मदद करता है.
३. च्विंगम पेट में २ साल तक चिपका रह सकता है.
प्रभाव- नहीं, ये सिर्फ मिथक है, हमारा पाचन तंत्र साधारणतया किसी भी चीज को ज्यादा से ज्यादा 48 घंटे तक रोक पता है, उसके बाद सारा अपचय पदार्थ स्वतः बहार निकलना शुरू कर देता है. हमारा पाचन तंत्र इसी नियम पर काम करता रहता है, हां यदि किसी को पेट कब्ज की शिकायत है, तो ये काफी समय तक पाचन प्रक्रिया में फंसा रहता है और पेट की समस्या पैदा करता रहता है.
ये मिथक बच्चों को च्विंगम से दुरी बनाए रखने के लिए उनके माता- पिता या भाई बहन प्रयोग करते हैं ताकि बच्चे इसे अधिक न लें.
४. च्विंगम चबाने से दाँत व् मसूड़े स्वस्थ रहेंगे
प्रभाव: नहीं बल्कि इसके कुछ प्रभाव ऐसे होंगें जैसे दाँतों का घिसाव बढ़ जाता है और यदि इसमें शुगर की मात्रा अधिक है तो सड़न का कारण भी बन सकतें हैं, इसका अत्यधिक प्रयोग हमारी जबड़ों की लाइनों को बिगाड़ भी सकते हैं.
५. च्विंगम चबाना पेट में अधिक मात्रा में पाचक रस भेजता है, जिससे खाने को अच्छी तरह पचने में मदद मिलती है
प्रभाव: ये सिर्फ मिथक है, च्विंगम का अधिक प्रयोग-मुँह को चलाने का अत्यधिक प्रयोग, मुँह की मांसपेशियों पर जरूरत से ज्यादा भार बढ़ा देता है जिससे कई तरह की समस्यां पैदा हो जाती हैं, इसमें जबड़ों में दर्द व् सर दर्द की शिकायत भी हो सकती है क्योंकि जबड़ों की मांसपेशियां हमारे सर के बड़े भाग में फैली होती हैं.
६. च्विंगम चबाने से मसूड़े मजबूत बन जातें हैं और जबड़ों का व्यायाम भी होता है.
प्रभाव: व्यायाम कोई भी हो, जरूरत से अधिक व्यायाम नुक़साम भी कर देता है., यदि च्विंगम कभी कभी लिया जाय तो, हो सकता है ये मदद करे पर जैसे ही इसकी आदत पड़ती है, ये फायदा पहुँचाने के बजाय नुकसान करने लगता है.
चीनी युक्त च्विंगम दांतो के सड़न में, शुगर लेवल बढ़ने में व् दांतो के घिसने और मुँह की माँसपेशियों में दर्द की शिकायत तक के लिए जिम्मेदार हो सकती है.
च्विंगम को चबाने में अधिक लार व् पाचक रस पेट के लिए अच्छे हो सकते है, पर काम मात्रा में लेनेपर।



