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पीरियड्स के दौरान सेक्स: क्या आप गर्भवती हो सकती हैं?

दिसंबर 07, 2023

 पीरियड्स के दौरा: क्या आप गर्भवती हो सकती हैं?न सेक्स


यह एक मिथक है कि आप मासिक धर्म के दौरान गर्भवती नहीं हो सकतीं । जहां तक ​​गर्भवती होने का सवाल है, इस बात की कोई 100% गारंटी नहीं है कि मासिक धर्म के दौरान कोई महिला गर्भवती नहीं हो सकती है। हालाँकि मासिक धर्म के दौरान गर्भवती होने की संभावना कम होती है, फिर भी आप गर्भवती हो सकती हैं।


डिंबोत्सर्जन के बाद एक अंडाणु महिला की फैलोपियन ट्यूब में 24 घंटे तक जीवित और व्यवहार्य रह सकता है। आपके गर्भवती होने की संभावना ओव्यूलेशन के दौरान अधिक होती है, जो आपके मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 14 दिन पहले होता है। इसलिए यदि आपका मासिक धर्म चक्र छोटा है या यदि आपका मासिक धर्म अनियमित है, तो आपके ओव्यूलेशन और अंडे की रिहाई पर नज़र रखना बहुत मुश्किल है। इसके परिणामस्वरूप, जब आप पीरियड्स के दौरान सेक्स करती हैं तो आपके गर्भवती होने की संभावना बढ़ सकती है। इसके अलावा, ऐसे कई कारक हैं जो मासिक धर्म संबंधी अनियमितताओं का कारण बनते हैं जिनमें वजन घटना, पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस), एंडोमेट्रियोसिस आदि शामिल हैं। इन कारकों के कारण, एक महिला अपने मासिक धर्म सहित महीने के किसी भी समय गर्भवती हो सकती है।

इसलिए यदि आप गर्भधारण की योजना नहीं बना रही हैं तो मासिक धर्म के दौरान यौन संबंध बनाते समय भी कंडोम या जन्म नियंत्रण गोलियों जैसी सुरक्षा का उपयोग करना बुद्धिमानी है।

क्या पीरियड्स के दौरान सेक्स के कोई फायदे हैं?



ऐसे कई शोध अध्ययन हैं जो बताते हैं कि मासिक धर्म के दौरान सेक्स करने से महिला के समग्र स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यहाँ कुछ फायदे हैं:

छोटी अवधि का कारण बनता है: मासिक धर्म के दौरान योनि संभोग से मासिक धर्म के रक्त के प्रवाह में वृद्धि हो सकती है क्योंकि संभोग गर्भाशय में संकुचन का कारण बनता है। इसके परिणामस्वरूप मासिक धर्म का रक्त और कोशिकाएं अधिक तेजी से बाहर निकलने लगती हैं, जिससे मासिक धर्म सामान्य से अधिक तेजी से रुक जाता है।

मासिक धर्म के दर्द को कम करता है: कुछ महिलाएं मासिक धर्म के दौरान संभोग को अधिक राहत के रूप में पाती हैं क्योंकि यह डोपामाइन और एंडोर्फिन जारी करता है जो मासिक धर्म की ऐंठन के कारण होने वाले दर्द को कम करने के लिए प्राकृतिक दर्द निवारक हैं। इसके अलावा, यह मासिक धर्म से पहले के लक्षणों (पीएमएस) को कम करने में मदद करता है। हालांकि, यदि मासिक धर्म बहुत भारी है तो सेक्स न करना बेहतर है क्योंकि इसमें अतिरिक्त ऊर्जा की खपत हो सकती है।

सेक्स ड्राइव बढ़ती है: हालाँकि हर महिला को मासिक धर्म के दौरान सेक्स करने की इच्छा महसूस नहीं होती है, लेकिन कुछ ऐसी भी होती हैं जिनमें महीने के उस समय के दौरान सेक्स ड्राइव में वृद्धि देखी जाती है। ऐसा मासिक धर्म के दौरान शरीर में होने वाले कई हार्मोनल बदलावों के कारण होता है। एक अध्ययन से पता चला है कि इस चरण के दौरान न केवल यौन इच्छा बल्कि यह एक महिला में कामुक कल्पनाएँ भी पैदा कर सकती है।

माइग्रेन से राहत: यौन गतिविधियों से जुड़ा सिरदर्द एक जानी-मानी समस्या है। इसके अलावा, यह भी बताया गया है कि माइग्रेन से पीड़ित लगभग 50% महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान माइग्रेन के हमलों का अनुभव होता है।हालाँकि माइग्रेन सिरदर्द से पीड़ित अधिकांश महिलाएँ पीरियड्स के दौरान यौन गतिविधि को प्राथमिकता नहीं देती हैं, लेकिन 2013 में ऑनलाइन प्रकाशित एक अध्ययन से एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है। अध्ययन के अनुसार, पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से माइग्रेन सिरदर्द से पीड़ित कुछ महिलाओं को सिरदर्द से आंशिक या पूर्ण राहत मिल सकती है।

पीरियड्स के दौरान सेक्स के क्या दुष्प्रभाव हैं?

सबसे पहले, पीरियड्स के दौरान सेक्स पहली बार में एक बड़ा बदलाव हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि खून आप पर, आपके साथी पर और चादर पर लग सकता है, खासकर यदि आपको भारी मासिक धर्म हो। यह आपको थोड़ा संकोची बना सकता है और आपको कार्य का आनंद लेने से रोक सकता है। साथ ही, यह चिंता भी कि यह कार्य गड़बड़ हो सकता है, सेक्स का मज़ा छीन सकता है।

मासिक धर्म के दौरान सेक्स को लेकर दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण चिंता एचआईवी या हेपेटाइटिस जैसी यौन संचारित बीमारियों (एसटीडी) से संक्रमित होने का खतरा है।[1] यदि आप या आपका साथी एसटीडी से पीड़ित हैं, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि मासिक धर्म के दौरान यौन संबंध बनाने से रक्त में मौजूद वायरस फैल सकते हैं। इसके अलावा, मासिक धर्म के दौरान महिला की गर्भाशय ग्रीवा अधिक खुली होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, यौन संचारित रोगों से पीड़ित होने और उसकी चपेट में आने के जोखिम को कम करने के लिए कंडोम जैसी सुरक्षा का उपयोग नितांत आवश्यक है।

तीसरा, अगर आप टैम्पोन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सेक्स करने से पहले इसे हटा देना ही समझदारी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यदि आप सेक्स से पहले इसे हटाना भूल जाते हैं, तो इस बात की अधिक संभावना है कि यह योनि में चला जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो आपको इसे हटाने के लिए डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है।

क्या मासिक धर्म के दौरान सेक्स करना सुरक्षित है?

सबसे पहले, दोनों पार्टनर्स को पीरियड सेक्स के विचार के साथ सहज होना चाहिए अन्यथा यह एक बड़ा उलटफेर होगा। साथ ही, यह ऐसी चीज़ है जिसकी योजना पहले से बनाई जानी चाहिए ताकि इसमें शामिल होने के दौरान किसी को नुकसान न हो, क्योंकि यह स्पष्ट रूप से गड़बड़ होगा। हालाँकि मासिक धर्म के दौरान सेक्स थोड़ा गड़बड़ हो सकता है, लेकिन यह सुरक्षित है।

अच्छे स्किन केयर प्रोडक्ट्स- महंगे या सस्ते ?

नवंबर 10, 2023

 महंगे त्वचा सम्बन्धी उत्पाद हमेशा अच्छे होते हैं ! सच है या मिथक ?


ये सही है कि अच्छे उत्पादों की लागत ज्यादा होने के कारण उनकी कीमत या प्राइस अधिक होती है, किन्तु ये जरूरी नहीं  कि अच्छे उत्पाद हमेशा महंगे हों, कुछ अच्छे उत्पाद साधारण होते हुए भी, बड़े अच्छे परिणाम देते हैं.  

महंगे उत्पाद:  (Amazon.in के अनुसार )    

(हम किसी भी प्रोडक्ट की पब्लिसिटी या सपोर्ट  नहीं कर रहे हैं, सिर्फ महंगे और सस्ते प्रोडक्ट्स में क्या अंतर है उसकी जानकारी देने की कोशिश है कृपया किसी भी उत्पाद को चुनने में अपने विवेक से काम लें. )

  
L'Oreal  Skin  Losion 
Rs. 5999/-



          Rs 7479/-

 



सस्ते उत्पाद जो महंगें उत्पादों से कम नहीं 
Rs 223/-





Rs 136/-



Rs.50/-


 बेसन का लेप 


Rs. 30/-

फलों का रस (जूस)


Rs. 50/- 

स्किन क्रीम 


Rs.118/-

Rs. 161/-

  
सुपर सस्ते उत्पाद जो महंगे उत्पादों से बेहतर हैं 

फिटकरी 


किसी भी कटे फ़टे घाव या शेव से कटे घाव से रक्त के बहाव को रोकने के लिए, घर में मौजूद फिटकरी से अच्छा  कोई और उत्पाद नहीं होता। 

ज्यादातर घरों में यूज होने वाली फिटकरी का रासायनिक नाम पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट है। जो घरों में एंटीसेप्टिक के रूप में यूज होती है। फिटकरी में एंटीबायोटिक, एंटी-ट्राइकोमोनस, एस्ट्रिंजेंट, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। जो आफ्टर शेव से लेकर घाव और मुहांसों तक को ठीक करने में मदद कर सकते हैं

 यदि हम फिटकरी की तुलना आफ्टर शेव लोशन से करें तो, साधारण कटने छिलने पर यदि हम कुछ सेकेण्ड के लिए फिटकरी का प्रयोग रक्त के बहाव को रोकने के लिए करें तो हम पाते हैं की जहाँ पर फिटकरी लगाई जाती है वहां तुरंत रक्त बहना बंद हो जाता है, और इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं मिलता है. इसके विपरीत यदि हम रक्त के बहाव को रोकने के लिए आफ्टर शेव का प्रयोग करें, तो वह प्रभावी नहीं मिलता, इसके साथ ही आफ्टर शेव के बहुत से साइड इफेक्ट हैं जो अलग -२ त्वचा पर अलग -२ हो सकते हैं.

यूरीन इंफेक्शन हो जाने पर भी फिटकरी का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है. प्रतिदिन फिटकरी के पानी से प्राइवेट पार्ट की सफाई करने से इंफेक्शन का खतरा दूर हो जाता है. इसके अलावा पानी में घुलनशील अशुद्धि को दूर करने के लिए भी फिटकरी का इस्तेमाल किया जाता है. 


हल्दी का लेप : सदियों से भारत में हल्दी का विभिन्न तरह से पयोग होता आया है, व् मुख्य रूप से हल्दी के लेप का पयोग त्वचा का सूंदर व् कोमल रखने में होता है, अब तो स्किन केयर उत्पाद बनाने वाली संस्थाएं हल्दी का प्रयोग बहुतायत कर रही हैं.
यदि हम इसके साइड इफेक्ट की तुलना अन्य उत्पादों से करें तो हल्दी के लेप का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं मिलता, इसके विपरीत प्रयोगकर्ता को कुछ न कुछ लाभ अवश्य होता है. हल्दी के अन्य बहुत से उपयोग होते हैं जैसे साधारण चोट लगने पर हल्दी का लेप लगाने से लेकर गर्म दूध के साथ पीने पर बहुत अच्छा लाभ मिलता है.
अन्य त्वचा सम्बन्धी लेप जैसे हल्दी चन्दन का लेप, हल्दी बेसन का लेप, हल्दी चन्दन बेसन व् एलोवीरा (धृतकुमारी ) का लेप. 





खीरे का लेप : Rs 20/-



खीरे के लेप के कई फ़ायदे हैं:


  • घाव सुखाने और सूजन को दूर करने के लिए खीरा का प्रयोग किया जाता है. खीरा को पीसकर उसमें थोड़ा नमक मिलाकर घाव की सूजन पर ऊपर से लेप करने से सूजन कम हो जाती है.
  • मुहांसों तथा रूखी त्वचा की परेशानी को ठीक करने के लिए खीरा का लेप लगाया जा सकता है.
  • आंखों की बीमारी में - खीरे को पीसकर आंखों के बाहर चारों तरफ लेप लगाने से आंखों के बाहर होने वाले काले धब्बे मिट जाते हैं.
  • गले के रोग में - गले के रोग में खीरा का उपयोग फ़ायदेमंद होता है.
  • बेसन और खीरा फेस पैक - बेसन में खीरे का रस डालकर चिकना पेस्ट तैयार करें. इस लेप को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगा लें. करीब 20 मिनट या फेसफ़ैक सूखने के बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें.
 खीरे में मिलने वाले पदार्थ जो हमारी त्वचा व्प्रो सेहत के लिए अच्छे हैं.
  •           प्रोटीन, फ़ाइबर, विटामिन सी, विटामिन के, कार्ब्स, मैग्नीशियम, पोटैशियम, मैंगनीज|
  •           खीरे में कई एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं. इसमें करीब 96% तक पानी होता है.
  •           खीरा पल्प और चंदन पाउडर का लेप बनाकर त्वचा पर फेस पैक की तरह लगाने से आपकी स्किन की टैनिंग दूर होती है। यदि त्वचा पर सनबर्न हुआ है तो आपको तुरंत आराम मिलता है। खीरा और चंदन पाउडर का लेप आपकी त्वचा का निखार बढ़ाने में मदद करता है।

        खीरे का रस चेहरे पर कैसे लगाएं?
         
          खीरा से टोनर बनाने का तरीका :-
  1.                     टोनर के बनाने के लिए 2-3 खीरा को अच्छे से धो लें।
  2.                     अब खीरा को मिक्सी में पीस लें।
  3.                     खीरा के मिक्चर को एक साफ कॉटन के कपड़े में डालें और इसकी मदद से रस निचोड़ लें।
  4.                     अब इस रस को एक स्प्रे बोतल में डालें।
  5.                     खीरे के रस में 4-5 चम्मच गुलाब जल मिलाएं। और आवश्यकता अनुसार साफ सुई से अपनी त्वचा पर लगाएं और साफ करें।











अंडे से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है? मिथक या फेक्ट

अक्टूबर 31, 2023

 क्या अंडे से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है? सच या मिथक 




अंडे का सेवन, सालों से विवादित भोजन के रूप में होता आया है,किन्तु लगातार होने वाली वैज्ञानिक शोध से अण्डों को धीरे धीरे विवादित भोजन से गुड प्रोटीन व् विटामिन्स के स्त्रोत के रूप में होने लगा है.

अंडा हमारी भोजन सामग्री में सबसे बेहतर और सुरक्षित प्रोटीन और विटामिन्स का स्त्रोत है, ये सही है की रोज ०२ अंडे से अधिक का सेवन किया जाए तो गुड़ और बेड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है,लेकिन ये आपकी स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है. यदि आप स्वस्थ हैं और आप का कोलेस्ट्रॉल स्तर ठीक है तो आप अंडे से शुध्द प्रोटीन के साथ अन्य विटामिन्स ले सकते हैं। 

Eggs benefits: अंडा खाने के लाभ : 

प्रोटीन्स :
अंडे शुद्ध प्रोटीन्स के अच्छे व् सुलभ स्त्रोत हैं.

मस्तिष्क का स्वास्थ्य: अंडे का सेवन मष्तिस्क से स्वास्थ्य व् पोषण में सहायक विटमिनिंस उपलब्ध करता है.

नेत्रों का रखरखाव व् स्वास्थ्य: अण्डों के सेवन से आँखों के स्वास्थ्य व् रखरखाव में मदद मिलती है.

त्वचा की सुरक्षा व् रखरखाव: त्वचा को कोमल व् सूंदर बनाने में भी अण्डों का सेवन मदद करता है.अण्डों के सेवन से त्वचा में डेग धब्बे व् झुर्रियां कम पड़ती हैं.

इम्यून सिस्टम या प्रतिरक्षा प्रणाली: अण्डों में पाया जाने वाले विभिन्न विटामिन्स में विटामिन A, विटामिन B 12, तथा सेलेनियम हमारी स्वास्थ्य रक्षा प्रणाली को मजबूत बनता है.

हृदय का स्वास्थ्य: अण्डों में उपलब्ध कॉलिन नमक तत्व हृदय की बीमारी पैदा करने वाले एमिनो एसिड होमोसिस्टेलिन को तोड़ने में सहायक होता है.

पोषक तत्व : क्योकि अंडे विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों (  vitamins A, E, B5, B12, iron, iodine, and phosphorus.)से भरपूर होते हैं इसलिए ये हमारे शरीर को स्वस्थ व् सुदृढ़ बनाने में मदद करते हैं 
 

अंडा शुद्ध प्रोटीन का सबसे आसान और सस्ता स्त्रोत है, अंडे का नाम आते ही हमारे दिमाग में बहुत से सवाल आते हैं ?

1.अण्डों में कोन -२ पदार्थ होते हैं ? 

2.क्या हम रोज अंडा ले सकते है ?

3.अंडा खाने के लाभ और हानि 

4.कितने अंडे रोज खा सकते हैं 

5.क्या BP से पीड़ित अंडा खा सकते हैं ?

6.उबला अंडा या ऑमलेट, क्या है बेहतर ?

7.साधारण (फार्मी) अंडा या देसी अंडा  

8.अण्डों में कोन -२ पदार्थ होते हैं ? 

अण्डे में उपलब्ध तत्व :

-फैट या चर्बी : 05 %

-सैचुरेटेड या संतुलित फैट: 1.5 g 
(बुरा फेट या वो फेट जो आसानी से नहीं टूटता और शरीर में जमा होता रहता है)
 
-पोली अंसतुलित  फैट: 1g 

-ट्रांसफैट : 0 g 

-मोनोअसंतुलित  फैट: 1.5 g 

 (Omega-3s Omega 3 fatty acids are a group of essential fatty acids comprising polyunsaturated(पाली असंतुलित ) and monounsaturated (मोनो असंतुलित) fatty acids that play a key role in cell maintenance. Eggs are one of the best sources of omega 3 fatty acids other than oily fish that are valuable for augmenting heart and brain health and also safeguarding eyes)

-कोलेस्ट्रॉल: 165 mg 

-विटामिन्स :

Vitamin D 0.9mcg 4%

Vitamin A 70mcg 8%

Vitamin B2 Riboflavin 0.2mg 15%

Vitamin B3 Niacin 1.3mg 8%

Vitamin B6 Pyridoxine 0.1mg 6%

Vitamin B12 Methyl cobalamine 0.4mcg 15%

Vitamin E 0.5mg 4%

Vitamin B9 Folate 20mcg DFE 6%

Vitamin B5 Pantothenic Acid 0.7mg 15%

Vitamin B7 Biotin 9mcg 30%

कार्बोहाइड्रेट: 0 g 

-शुगर या ग्लूकोस: 0 g 

प्रोटीन: 06 g 

Calcium 30mg 2%

Iron 0.8mg 4%

Sodium 60mg 3%

Potassium 60mg 0%

Phosphorus 90mg 8%

Iodine 24mcg 15%

Zinc 0.6mg 6%

Selenium 14mcg 25%

इस तरह हम देख सकते हैं अंडे खाने से हमें कोन -२ से पदार्थ मिलते हैं, किन्तु हमें इसका कितना सेवन करना है ये ज्यादा महत्वपूर्ण है. एक अंडा खाने से हमें इतना अच्छा व् बुरा कोलेस्ट्रॉल नहीं मिलता जो हमारे खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाए. यदि अंडे के शौकीन हैं तो हर हफ्ते १-२ अंडे कोई भी ले सकता है.

क्या हम रोज अंडा ले सकते है ?

एक अंडे से हमें  207 mg कोलेस्ट्रॉल मिलता है जो की हमारी रोजाना भोजन में कोलेस्ट्रॉल लेने की सीमा का 69 % है। किन्तु ये सारा अच्छा या बुरा दोनों तरह का कोलेस्ट्रॉल अंडे के पीले यानि एग योक या पीली जर्दी में होता है. इसलिए जिन लोगों को ह्रदय की परेशानी- बीमारी या हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल है तब भी इस तरह के हार्ट पेशेंट अंडे का सफ़ेद भाग या एग व्हाइट ले सकते हैं. 


क्या BP से पीड़ित अंडा खा सकते हैं ?

 ब्लड प्रेशर के पेशेंट एग व्हाइट ले सकते हैं क्यो कि ब्लड प्रेशर बढ़ने के अनेक कारण हो सकते हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ने का सबसे मुख्य कारण ब्लड में सोडियम की अधिकता है, दूसरा कारण  हृदय वाल्व का थोड़ा कड़ा होना हो सकता है जो की या तो बढ़ती उम्र के कारण या अनुवांशिक हो सकता है.
सिर्फ किसी एक पदार्थ के खाने से ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता है.
यदि पेशेंट ने लगातार सालों तक अधिक मात्रा में नमक-मसाले और तेल युक्त पदार्थों का सेवन किया है  तब भी इस तरह की स्थिति बन जाती है 


उबला अंडा या ऑमलेट, क्या है बेहतर ?

अंडे का ऑमलेट बनाने में तेल या दूसरे तरह के फेट का प्रयोग किया जाता है जो की सैचुरेटेड फैट (संतुलित फैट ) होता है व् अंडे को तलने में उसमें मौजूद विभिन्न तत्व या तो ख़राब हो जाते हैं या तेल के साथ संतुलित हो जाते हैं जिससे उसको डाइजेस्ट करना मुश्किल हो जाता है व् उसमें बुरा कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है और शरीर में जमा होने लगता है। 
जबकि अंडे को पानी में उबलने पर उसमें मौजूद विटामिन्स व् प्रोटीन वैसा ही बना रहता है जिससे उसमें मौजूद तत्वों का संतुलन वैसा ही बना रहता है, तथा अंडे में उपलब्ध सभी तत्व खाने के लिए सुरक्षित बने रहते हैं इसलिए उबला अंडा ऑमलेट से अधिक सुरक्षित व् स्वास्थवर्धक होता है. 

देसी अंडा या फर्मी अंडा ? क्या है बेहतर ?

यह  एक बहुत कॉमन प्रचलित  मिथक है कि देसी अंडे ज्यादा हेल्थी या स्वास्थ्यवर्धक होते हैं, दोनों तरह के अंडे मुर्गियां प्राकर्तिक तरीके से पैदा करती हैं, सिर्फ दोनों के रंग व् आकार में अंतर होता है. फार्मी मुर्गियाँ संकर नस्ल की होती हैं, उनको अलग-अलग प्रजातियों को क्रॉस करा कर अच्छी व् बड़ा अंडा देनेवाली नस्ल बनाई जाती है जिससे ज्यादा बड़े अंडे व् ज्यादा मांस देनेवाली नस्ल या प्रजाति तैयार हो, किन्तु जब ये प्रजनन करते हैं तो वह प्राकर्तिक होता है व् उनको अच्छा आहार  दिया जाता है जिससे इन मुर्गियों को बड़े सफ़ेद अंडे व् अधिक मांस बनाने में आसानी होती है.


देसी मुर्गियां क्योंकि विभिन्न रंगों की होती हैं इसलिए इनके द्वारा दिए जाने वाले अंडे भी थोड़ा रंग (ब्राउन) लिए हुए होते हैं  तथा इनके द्वारा दिए जाने वाले अंडे थोड़े छोटेआकार में भी होते हैं.
यदि हम उसमें उपलब्ध तत्वों के अनुपात की बात करें तो दोनों में सामान पाया गया है, बल्कि बड़े अण्डों  में बड़े आकार के होने के कारण प्रोटीन व् विटामिन्स की मात्रा भी अधिक होती है.
इसलिए फार्मी अण्डों को अधिक मूल्य पर खरीदने का कोई औचित्य नहीं है.

 






 

क्या फलों के रस से ब्लड ग्लूकोस लेवल बढ़ता है ?

अक्टूबर 15, 2023

 मिथक: फलों का जूस लेने से शुगर बढ़ती है.

फैक्ट: 60 % हाँ, 40 %नहीं 

हाँ: यदि फल मीठे हैं तो, अधिक मात्रा में या जूस लेने पर.

नहीं: सभी फल शुगर नहीं बढ़ाते, जूस के बजाय यदि पूरा फल खाया जय और थोड़ा थोड़ा खाया जय तो खून में शुगर का स्तर कंट्रोल रहता है. फल का सेवन करते समय रोटी, आलू और चावल (कार्बोहाइड्रेट-शुगर से भरपूर पदार्थ)आदि का प्रयोग न करें।




क्या फलों का रस ले सकते हैं डायबेटिक ?

शुगर के पेशेंट द्वारा फलों का रस यदि अधिक मात्रा में लिया जाय तो खून में शुगर की मात्रा का बढ़ना स्वाभाविक है.

फलों का रस आसानी से व् तुरंत डाइजेस्ट हो कर खून में घुल जाता है इसलिए ये देखा गया है कि शुगर के पेशेंट यदि फलों का रस न ले कर, सिर्फ फलों को सीधे उपयोग करते हैं तो उनका शुगर लेवल धीरे धीरे व् प्राकर्तिक रूप से बढ़ता है. क्यों ?

  • फल यदि पूरा खाया जाता है तो वह धीरे धीरे पचता है इसलिए खून में शर्करा या ग्लोकोस भी धीरे धीरे पहुँचता है 
  • फलों के रस के विपरीत, फलों को पचाने के लिए पाचन तंत्र को बहुत से पाचक रस बनाने पड़ते हैं इसलिए भी ये परीकिर्या धीरे धीरे व् प्राकर्तिक गति से होती है व् जरूरत के हिसाब से इसको धीमे ता तेज किया जा सकता है 
  • फलों का रस आसानी से टूट जाता है या पच जाता है और अपने अंदर मौजूद शुगर को तुरंत खून में पहुंचा देता है, इसलिए फलों का रस लेने पर खून में ग्लूकोस की मात्रा तुरंत बढ़ जाती है.
  • फल यदि पूरा खाया जाता है तो ये ग्लूकोस के अतिरिक्त अपने साथ और बहुत से अन्य पदार्थ, जो की हमारी पाचन प्रणाली के लिए जरूरी होते हैं, ले कर आता है, इसमें सबसे जरूरी होता है फाइबर और अन्य पोषक तत्व, जो हमारे भोजन को हमारी आंतों में आसानी से आगे बढ़ने व् पचने में मदद करते हैं. 
  • इसके अतिरिक्त फलों में मौजूद एंटी ओक्सिडेंट्स हमारी त्वचा को जवान बनाए रखने में भी  सहायक होते हैं. यदि फल अधिक मीठे हैं तो उसमें मौजूद शुगर या कार्बोहायड्रेट भी अधिक होता है, इसलिए शुगर (डाईबेटिक )से पीड़ित लोग फल के साथ साधारण खाना जिसमें रोटी या चावल की मात्रा अधिक होती है, न लें। 


फलों के रस या पूरा फल खाते समय 
क्या नहीं लेना चाहिए शुगर के मरीजों को  :-

१. शुगर से पीड़ित को ज्यादा मीठे फल या तो नहीं लेने चाहिए या बहुत कम मात्रा में लेने चाहिए या धोड़ा -२ कर के लेना चाहिए जिससे उनके शरीर में एकसाथ बहुत सारा ग्लूकोस या चीनी न पहुंचे।
फलों का सेवन करते समय शुगर पीड़ित को रोटी, चावल, आलू या ऐसे पदार्थ नहीं लेने चाहिए (जिसमें कार्बोहाईड्रेट (शुगर) की मात्रा अधिक होती है ) व् अपने ब्लड शुगर लेवल का ध्यान रख कर ही किसी भी फल को लेना चाहिए।
हाँ यदि वे हरी सब्जियों का सेवन करते हैं तो ऐसा करने पर उनका ब्लड ग्लूकोस नहीं बढ़ेगा  
२. शुगर के पेशेंट यदि कच्चा खाने योग्य फल या सब्जी का प्रयोग अधिक करें तो उनको इन फल सब्जियों से बहुत से ऐसे पदार्थ, जो शुगर को नियंत्रण में रखते हैं, प्राप्त हो जाएंगे, जो कि सामान्य रूप से उन सब्जियों को पकाने से ख़राब या ख़त्म हो जाते है 


फल सब्जियां (यदि आर्गेनिक हो तो और भी अच्छा) जिसे  शुगर से पीड़ित कभी भी ले सकते हैं  
  • बंद गोभी 
  • टमाटर 
  • पपीता 
  • ब्रोकली 
  • एस्पेरेगस या शतावरी 
  • चुकन्दर 





मधुमेह वाले लोगों के लिए सबसे खराब फलों में आम, कटहल, केला, चिक्कू और अंगूर शामिल हैं। इन फलों में चीनी अधिक और फाइबर कम होता है।

और क्या करें ?

1. अपने डॉक्टर से सलाह करके अपने लिए भोजन चार्ट बनवाएं व् उसमें समय-२ पर मामूली बदलाव के साथ अपना भोजन लें. कभी -२ शुगर लेवल देखकर बहुत थोड़ी मात्रा में अपने मनपसंद के भोजन का भी सेवन करें जिससे आपकी इच्छा भी पूरी होती रहे.
२. इन्सुलिन पौधे के पत्तों का अपनी दवाइयों के साथ सेवन कर सकतें हैं (इन्सुलिन पौधे के बारे में बहुत सी अफवाहें हैं इसलिए सिर्फ इन्सुलिन पौधे से आपका शुगर लेवल नियंत्रण हो जायेगा जरुरी नहीं, हां, इन्सुलिन के पत्तों का दवाइयों के साथ इस्तेमाल से उसमें मदद जरूर मिल सकती है, लेकिन इसका असर हर एक व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।)
३. सुबह का नाश्ता शुगर फ्री फ्रूट से करें व् उसके साथ गेहूं,चावल,आलू से बनी वस्तुओं का प्रयोग न करें 
४. जहाँ तक संभव हो सके कच्ची खाने लायक हरी सब्जिओं का सेवन करें कम मसालों का प्रयोग करें।
५. फलों के रस के बजाय पूरा फल खाने में लें 
६. ज्वार बाजरे का सेवन बढ़ाएं 
७. व्यायाम करना इन सबमें- सबसे जरुरी है, इसलिए अगर लम्बी आयु की इच्छा रखतें हैं तो रोजाना व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
 
 इन्सुलिन प्लांट के पत्तों का इस्तेमाल करने से पहले, सुनिश्चित करें कि पौधा वास्तविक है (साइंटिफिक नाम Costus Ignous ).






काम की बात 

व्यायाम क्यों है जरूरी ?
हमारे शरीर में हमारा भोजन पचने के बाद, पाचन तंत्र भोजन में मौजूद शुगर या ग्लूकोस को सीधा हमारे खून में पहुँचा देता है.  उसके बाद जरूरत के हिसाब ये शर्करा या शुगर या ग्लूकोस हमारे शरीर के विभिन्न हिस्सों में बाँट दी जाती है, इस ग्लूकोस का बहुत बड़ा हिस्सा हमारी हाथों-पैरों की मांसपेशियों में पहुँचता है जहाँ इसे विभिन्न कामों में खर्च कर लिया जाता है. यदि हम एक ही जगह पर पड़े रहते है या ऐसा काम करते हैं जिसमें न के बराबर चलना-उठना-बैठना पड़े तब ये ग्लूकोस हमारे रक्त में ही बना रहता है और हमारा शरीर इसको मूत्र के साथ बाहर निकलने की कोशिश करता रहता है. यदि ये स्थिति लम्बे समय तक चलती रहे तो शुगर या मधुमेह की शिकायत में बदल जाती है 
लेकिन इस आदत को यदि समय से बदल लिया जाय और अपनी दैनिक किर्याओं में यदि हल्का व्यायाम या टहलना घूमना फिरना शमिल कर लिया जाए तो मधुमेह से बचा भी जा सकता है या मधुमेह को नियंत्रण में रखा जा सकता है.


क्या मैं 5 मिनट में अपना ब्लड शुगर कैसे कम कर सकता हूं?

आपके रक्त शर्करा को कम करने का सबसे तेज़ तरीका तेजी से काम करने वाला इंसुलिन लेना हैव्यायाम एक और तेज़, प्रभावी तरीका है। हालाँकि, गंभीर मामलों में, आपको अस्पताल जाना चाहिए। उच्च रक्त शर्करा के स्तर को हाइपरग्लेसेमिया या उच्च रक्त ग्लूकोज के रूप में जाना जाता है।



कुत्ते आधी रात के बाद क्यों रोते हैं ?

अक्टूबर 10, 2023

क्यों रोता है मेरा कुत्ता आधी रात में ?

मिथक:



कुत्तों का रोना साधारणतया अशुभ मन जाता है, व् किसी आनेवाली बुरी घटना से जोड़ कर देखा जाता है जो की सही नहीं है 

या ये माना  जाता है की कुत्तों को भूत या आत्माएं दिखाई देतें हैं, इसलिए आत्माओं को महसूस करक, डर के भोकतें  हैं या रोते  हैं 

कुत्तों की महसूस करने की क्षमता मनुष्यों से बहुत ज्यादा होती है इसलिए ये माना  जाता है कि कुत्ते आने वाली घटनाओं को महसूस कर लेते हैं इसलिए 



अनजान खतरे की संभावना पर भी कुत्ते भोंक या रो सकते हैं 

फैक्ट या कारण:

ध्यान आकर्षित करने के लिए : रो सकते हैं या 

अकेलापन या उपेक्षित महसूस कर रहे हों। तब भी आपका कुत्ता रो सकता है 



बाहर जाने की आवश्यकता: कुत्ते बाथरूम जाने के लिए बाहर जाने देने के लिए रो सकते हैं 

खासकर यदि वे अपने मूत्राशय को लंबे समय तक रोके रखने के आदी नहीं हैं।

सर्दियों के मौसम में:जब ठण्ड ज्यादा हो जाती है तब, यदि ज्यादा सर्दी महसूस करते है और किसी तरह बचने के लिए रो सकते हैं ( हम इंसानो में भी यदि ठण्ड से बचने के साधन न हो तो रात में ज्यादा ठण्ड पड़ने पर मुँह से कराह या आवाज निकलने लगती है ठीक वैसे ही)

प्राकर्तिक रूप से : कुत्ते, भेड़ियों के सुधरे हुए वंशज हैं भेड़िये भी रात में अपनी पोजीशन को अपने साथियों के साथ साझा करने के लिए भी रो या लम्बी हुक जैसी आवाज निकालते हैं जो हमें रोने जैसी लगती है. 

प्राकृतिक रूप से कुत्ते मनुष्यों से अधिक संवेदनशील होते हैं इसलिए कभी कभी अनजान खतरे का अनुभूति या अहसास करने पर भी कुत्ते रोते हैं 



चिविंगम खाना हानिकारक या दाँतों मसूड़ों के लिए अच्छा ?

अक्टूबर 04, 2023

 च्विंगम खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा या बुरा - मिथक व् उसके      प्रभाव   

च्विंगम खाने को लेकर बहुत से मिथक हैं जिनमें से कुछ अच्छे रिजल्ट के लिए बनाये गये हैं व् कुछ ऐसे ही बन गए हैं

मिथकों की दुनिआ : नकारात्मक व् सकारात्मक 

१- च्विंगम खाने से पेट में दर्द हो जायेगा 






 प्रभाव :यदि आपने जरुरत से ज्यादा च्विंगम खा लिया है और उसको अपनी आंतों में पंहुचा दिया है तो-हाँ -आपको पेट दर्द होने की पूरी संभावना है. च्विंगम को वैसे भी मुँह के स्वाद व् बदबू को दूर करने के लिए चबाया जाता है और फिर बाहर फेंक दिया जाता है. च्विंगम को अपनी आंतों में नहीं ले जाना चाहिए 

च्विंगम में जो पदार्थ मिलाये जाते हैं वे साधारणतया सीधे नहीं खाये जाते जैसे रेसिन, ह्यूमेक्टेंट्स (वे पदार्थ जो किसी भी चीज़ को आद्रक (Moist ) बनाये रखता है), एलास्टोमर्स, वैक्स या मोम, एमुल्सिफिएर, सॉफ्टनर्स, मीठा या शुगर और खुशबू। ये पदार्थ यदि अधिक मात्रा में खा लिया जाए तो पेट की परेशानी बढ़ सकती है.

दुनिया भर ने च्विंगम का सालाना  28 .6  बिलियन डॉलर का बाजार है, हर ब्रांड अपने प्रोडक्ट्स की सेल बढ़ाने के लिए तरह तरह के स्लोगन बना कर अपने सामान की  एक खास इमेज अपने ग्राहकों के दिमाग में डालने में लगे रहते है.इसके लिए कुछ मिथ भी बनाते है जो उनके प्रोडक्ट्स की सेल बढ़ाने में मदद करते हैं  नकारात्मक मिथक समाज में खुद बन जाते हैं जबकि सकात्मक मिथक, च्विंगम बनाने वाली कम्पनियाँ बनती हैं जिससे उनकी सेल बढ़ सके.

. च्विंगम रबर से बनाया जाता है इसलिए स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है या ये खाने की चीज नहीं है.

प्रभाव -सही है, इसमें पड़ने वाले पदार्थ किसी भी तरह से,इंसानों की फ़ूड चेन के हिस्से नहीं हैं, पर यदि कम मात्रा में लिया जाए तो मुँह के स्वाद व् खुसबू को देर तक बनाए रखने में मदद करता है.

३. च्विंगम पेट में २ साल तक चिपका रह सकता है.

प्रभाव- नहीं, ये सिर्फ मिथक है, हमारा पाचन तंत्र साधारणतया किसी भी चीज को ज्यादा से ज्यादा 48 घंटे तक रोक पता है, उसके बाद सारा अपचय पदार्थ स्वतः बहार निकलना शुरू कर देता है. हमारा पाचन तंत्र इसी नियम पर काम करता रहता है, हां यदि किसी को पेट कब्ज की शिकायत है, तो ये काफी समय तक पाचन प्रक्रिया में फंसा रहता है और पेट की समस्या पैदा करता रहता है.

ये मिथक बच्चों को च्विंगम से दुरी बनाए रखने के लिए उनके माता- पिता या भाई बहन प्रयोग करते हैं ताकि बच्चे इसे अधिक न लें.



४. च्विंगम चबाने से दाँत व् मसूड़े स्वस्थ रहेंगे 

प्रभाव:  नहीं बल्कि इसके कुछ प्रभाव ऐसे होंगें जैसे दाँतों का घिसाव बढ़ जाता है और यदि इसमें शुगर की मात्रा अधिक है तो सड़न  का कारण भी बन सकतें हैं, इसका अत्यधिक प्रयोग हमारी जबड़ों की लाइनों को बिगाड़ भी सकते हैं.


५. च्विंगम चबाना पेट में अधिक मात्रा में पाचक रस भेजता है, जिससे खाने को अच्छी तरह पचने में मदद मिलती है 

प्रभाव: ये सिर्फ मिथक है, च्विंगम का अधिक प्रयोग-मुँह को चलाने का अत्यधिक  प्रयोग, मुँह की मांसपेशियों पर जरूरत से ज्यादा भार बढ़ा देता है जिससे कई तरह की समस्यां पैदा हो जाती हैं, इसमें जबड़ों में दर्द व् सर दर्द की शिकायत भी हो सकती है क्योंकि जबड़ों की मांसपेशियां हमारे सर के बड़े भाग में फैली होती हैं.


६. च्विंगम चबाने से मसूड़े मजबूत बन जातें हैं और जबड़ों का व्यायाम भी होता है.

प्रभाव: व्यायाम कोई भी हो, जरूरत से अधिक व्यायाम  नुक़साम भी कर देता है., यदि च्विंगम कभी कभी लिया जाय तो, हो सकता है ये मदद करे पर जैसे ही इसकी आदत पड़ती है, ये फायदा पहुँचाने के बजाय नुकसान करने  लगता है.

चीनी युक्त च्विंगम दांतो के सड़न में, शुगर लेवल बढ़ने में व् दांतो के घिसने और मुँह की माँसपेशियों में दर्द की शिकायत तक के लिए जिम्मेदार हो सकती है.

च्विंगम को चबाने में अधिक लार व् पाचक रस पेट के लिए अच्छे हो सकते है, पर काम मात्रा में लेनेपर।



(च्विंगम के बहुत सरे ब्रांड बाजार में भरे पड़े हैं, और सभी अलग २ स्लोगन के साथ बाजार को आकर्षित करने के लिए इसके फायदे गिना रहे हैं जबकि इसके पीछे कोई मजबूत वैज्ञानिक आधार नहीं है.)


कुछ लोग आपराधिक प्रवर्ती के क्यों होते हैं ?

सितंबर 22, 2023


लोग अपने जीवन में अपराधी कैसे बनते हैं,



इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। यह कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं:



गरीबी और असामाजिक परिस्थितियाँ: गरीबी और असामाजिक समस्याएं एक व्यक्ति को आर्थिक और सामाजिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है, जिससे वह अपराधिक कार्यों की ओर मुड़ सकता है।

शिक्षा की कमी: शिक्षा की कमी व्यक्ति को गलत और अपराधिक कार्यों की ओर जाने की संभावना बढ़ा सकती है, क्योंकि शिक्षा विचारशीलता और नैतिक मूल्यों को फैलाने में मदद करती है।

परिवार के परिपेक्ष्य में समस्याएँ: एक असहमत परिवार, शारीरिक या मानसिक शोषण, या परिवार में अपराध की प्रवृत्ति एक व्यक्ति को अपराधिक दिशा में ले सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ: मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ व्यक्ति की निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकती है और उसे अपराध करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

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दोस्तों और समुदाय का प्रभाव: व्यक्ति के दोस्त और समुदाय का प्रभाव उसके व्यक्तिगत चयनों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है, जैसे कि वे किस प्रकार के विचारों और गतिविधियों में शामिल होते हैं।

नियति और आक्रमण: कुछ लोग अपराधिक कृत्यों में शामिल हो सकते हैं क्योंकि उन्हें नियति या आक्रमण के तहत अवसर मिलता है।

बायोलॉजिकल कारण: हॉर्मोन्स की मात्रा या अनुपात बिगड़ने पर या अधिक टेस्टोटेरोन के मस्तिष्क में बनने पर भी व् टेस्टोटेरोन-डीपामाईन और सेरोटोनिन के स्त्राव में बैलेंस न होने के कारण या मस्तिष्क में प्रे-फ्रंटल कोर्टेक्स के विकसित न होने के कारण भी लोग अपने पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं और अपराध कर  बैठते हैं. नवयुवकों में (१८-२० वर्ष से कम ) क्योंकि प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स ढीक से विकसित नहीं होने के कारण भी ऐसे बच्चे या युवक अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं, इसलिए आसानी से लड़ाई झगड़ों में उलझ जाते हैं। 

अनुवांशिक  कारण : यदि कोई व्यक्ति उपरोक्त सभी कारण के न होने के बावजूद यदि अपराधी प्रवर्ति का हो तो उसके पीछे उसको  DNA में मिले गुणों का होना भी हो सकता है, बच्चों में बहुत से गुण उनको उसके माँ बाप या उससे भी पीछे के दादा दादी या नाना नानी से आगे तक के गुण आ सकते हैं, हमारे बहुत से गुण हमें अपने परिवार से मिलते हैं हमारे कुछ गुण ऐसे भी हो सकते हैं जो एक पीढ़ी में सुषुप्तावस्था में रहे और अगले पीढ़ी में दिखाई पड़ते हैं। ऐसे गुण जरुरी नहीं की अपना प्रदर्शन करें ऐसे गुण उस व्यक्ति के सामाजिक परिवेश व् उसके परिवार की सहायता से नियंत्रित भी किये जा सकते  है.


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