नवजवानों को व्यायाम करते हुए हार्ट अटैक क्यों आ रहे हैं ? मिथ और कारण
नौजवानों में हार्ट अटैक क्यों
हार्ट अटैक आने के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं होता है, इसके पीछे बहुत से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं
A. बिना जांची हुई हार्ट कंडीशन: ज्यादातर नौजवानों के केस में ये मान कर चला जाता है कि इतनी कम उम्र में उनकी हार्ट कंडीशन अच्छी होगी, किन्तु ये सही नहीं है,. नोजवानो की हार्ट की स्थिति कई बार उनको किसी न किसी प्रकार की जाँच करते हुए ही पता चलता है या बहुत बार उनकी स्वास्थ्य कंडीशन ख़राब होने पर पता चल पता है.
ऐसी स्थिति में जब हार्ट पूरी तरह स्वस्थ न हो और अनजाने में खेलते या जिम में व्यायाम के दौरान उस पर अचानक व्यायाम का दबाव पड जाए, तब उनको हार्ट अटैक आने की सम्भावन बढ़ जाती है.
B. अनुवांशिक कारण : कुछ व्यक्तियों में हृदय रोग के अनुवांशिक लक्षण व् कारण होते हैं. जबकि ये लोग कम आयु के व् पतले- इकहरे शरीर के भी हो सकते हैं.
इस स्थिति में बहुत बार उन नोजवानो के हार्ट की स्थिति उतनी अच्छी नहीं होती जितनी मानी जाती है, इसलिए ये लोग भी हमेशा हार्ट अटैक के रिस्क में होते हैं.
यदि इन नवजवानो को अपनी स्वास्थय की पहले से से और सही जानकारी न हो तो भी, ये लोग हार्ट अटैक के साए में होते हैं इस तरह की कंडीशन में उनको अपने स्वस्थ की सही जानकारी, उनकी जान बचा सकती है.
C. अज्ञात उच्च रक्त दाब: यदि इन व्यक्तियों ने कभी भी अपने ब्लड प्रेशर पर ध्यान नहीं दिया है और वह लगातार हाई बना हुआ है (लगातार ब्लड प्रेशर है या अधिक रहे, तब भी इस तरह के व्यक्तियों को उसकी आदत पड़ जाती है )और ये लोग सामान्य जीवन जीते रहतें हैं,और जब खतरनाक स्थिति में पहुँचते है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, क्योंकि ये लोग न तो अवेयर होते हैं न किसी तरह की ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाई ले रहे होते हैं. ये लोग जब भी हार्ट अटैक का शिकार होते हैं या महसूस करते हैं उस स्थिति में भी ये लोग उसका कोई और कारण मान कर स्वयं दवाइयां ले लेते हैं, और यदि किसी वजह से उनकी स्थिति में थोड़ा सुधार आ जाय तो इसको सामान्य मान कर भूल जाते हैं किन्तु ये लोग ही सबसे अधिक खतरे में होते हैं. ऐसे ही लोग अधिकतर जागरूक न होने कारण हार्ट अटैक के शिकार बन जाते हैं, क्योंकि ये लोग हाई ब्लड प्रेशर की कोई भी दवाई नहीं ले रहे होते हैं इसलिए आपातकाल में इनके पास बचने का कोई विकल्प नहीं होता, यदि नजदीक में कोई हॉस्पिटल या चिकित्सक नहीं है तब ये लोग अपनी जान गवां बैठते हैं
D.अत्यधिक व्यायाम का शारीरिक दबाव: यदि व्यक्ति बिना जिम ट्रेनर की सलाह के अत्यधिक उत्तेजना में ज्यादा व्यायाम करते हैं तब भी इस तरह की स्थिति पैदा हो सकती है
व्यायाम को ये माना जाता है की इससे सब अच्छा होगा, किन्तु ऐसा होता नहीं, सबका शरीर एक जैसा नहीं होता, हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट, मशल फेट अनुपात (मांसपेशी और चर्बी अनुपात ) अलग -२ होता है. इसलिए व्यायाम का असर भी अलग अलग होता है, अचानक अत्यधिक व्यायाम करने की स्थिति में हृदय की धमनियों में रक्त बहने का दबाव बढ़ जाता है, और यदि उस व्यक्ति की धमनियां पहले से उच्च रक्त दबाव झेल रही हों तो इस तरह की स्थिति में उनको हार्ट अटैक/ लकवा/ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज जैसा कुछ होने की संभावना बढ़ जाती है.
व्यायाम करना चाहिए मगर अपने डॉक्टर या जिम ट्रेनर से एक बार सलाह जरूर ले लें ताकि कितना और कौन सा व्यायाम आप के लिए बेहतर है वो करें या हल्का व्यायाम हमेशा अच्छा होता है, यदि घर पर व्यायाम कर रहे हैं तो रोज थोड़ा -२ व् हल्का व्यायाम करें इससे आपके शरीर पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा और उसका फायदा भी आपको मिलेगा।
E. संक्रमण या सूजन : यदि व्यक्ति को किसी तरह का संक्रमण है या संक्रमण की वजह से धमनियों में सूजन है तब भी इस तरह की सम्भावन बन जाती है की व्यायाम करने से फायदे की बजाय शरीर को नुकसान ज्यादा हो जाता है या मृत्यु भी हो सकती है.
२. अस्पष्ट कारण:
F. स्वप्रतिरक्षी विकार (ऑटो इम्मून डिसऑर्डर्स ): कुछ लोगों में अत्यधिक स्वरक्षा प्रणाली विकार होता है, जिसकी वजह से इन लोगों में अत्यधिक संवेदनशीलता होती है यानि इन लोगोँ का शरीर किसी भी शारीरिक स्थिति को (प्राकर्तिक या स्वयं बनाया हुआ) बहरी संक्रमण समझ लेता है जिससे लड़ने के लिए ये अत्यधिक ऊर्जा खर्च करने लगता है (अत्यधिक छींके आना इसी तरह की परेशानी है) और यदि ये व्यायाम से होने वाली उत्तेजना और रक्तदबाव को भी संक्रमण समझ कर उस पर आक्रमण करने की कोशिश करता है जिसके परिणाम स्वरूप शरीर पर विभिन्न प्रकार केअसर पड़ सकतें हैं
G. शुरुआती हृदय रोग : कुछ लोगों में हृदय रोग के शुरुआती लक्षण होते हैं किन्तु ये रोग अपने लक्षण को काफी समय तक छुपा के रखता है यानि लक्षण काफी देर में दिखते हैं, क्योंकि अभी लक्षण नहीं दिखाई देते हैं तब भी ये माना जाता है की व्यक्ति स्वस्थ है उसको कोई परेशानी नहीं है. किन्तु आंतरिक सुरक्षा प्रणाली कमजोर होती है इसलिए अत्यधिक व्यायाम जानलेवा बन सकता है.
गुजरात में गरबा डांस के दौरान हार्ट अटैक से मौत, नवरात्रों में कम से कम १० केस सामने आए हैं किन्तु कारण स्पष्ट नहीं हैं. इंडिया टुडे न्यूज़ 21.10.2023
H. खानपान (अप्राकर्तिक प्रोटीन व् सप्लीमेंट ): यह सबसे अधिक व् महत्वपूर्ण कारण है आजकल जिम में हृदयघात से होने वाली मौतों के.कारण में ये सबसे ऊपर है. अधिक बड़ी व् सूंदर मांसपेशियों की चाह में 90 % लोग बाजार में उपलब्ध कृत्रिम प्रोटीन व् सप्लीमेंट का प्रयोग करने लगते हैं जो शरीर की मांसपेशियों को अप्राकर्तिक रूप से बड़ा व् कड़ा बनाता है इसकी वजह से शरीर के अन्य भागों पर भी उसका यही प्रभाव पड़ता है. लगातार इस तरह के सप्लीमेंट लेने के कारण हृदय की धमनियों व् वाल्व भी कड़ी हो जाती है जिसके कारण हृदय ठीक से काम नहीं कर पाता व् व्यायाम से रक्तदाब बढ़ने के कारण हृदयघात की सम्भावना बढ़ जाती है
सप्लीमेंट का अत्यधिक प्रयोग करने से हृदय व् धमनियों का आकर भी बढ़ जाता है व् वाल्व भी कड़ी हो जाती है जो की कोमल ( सॉफ्ट ) होनी चाहिए, रक्त का बहाव व् दबाव वाल्व के सही से काम करने पर अत्यधिक निर्भर करता है, यह जितना कोमल रहता है उतना अच्छे से काम करता है.
क्योकि अधिकतर नौजवान इस और ध्यान नहीं देते, इस लिए इस तरह के पदार्थों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं व् अनजाने में स्वनिर्मित हृदयघात की सम्भावना को बढ़ा देते हैं नौजवान होने की वजह से ये लोग न तो हृदय चिकित्सक से मिलते हैं न इस और ध्यान देते हैं
(इंडिया के मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को पिछले दिनों हार्ट अटैक आया और अब तक दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका इलाज़ चल रहा है। यहां उनकी तीसरी बार एंजियोप्लास्टी की गई। वो जिम में वर्कआउट के दौरान ट्रेडमिल पर गिर गये थे। राजू श्रीवास्तव ही नहीं कई अन्य हस्तियों को भी जो बहुत फिट दिखते थे उनको भी हार्ट अटैक हुआ है। कई लोगों की तो इससे जान भी चली गई। कुछ दिन पहले 'भाभीजी घर पर हैं' सीरियल के 41 वर्षीय दीपेश भान क्रिकेट खेलते हुए बेहोश हो गए और उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था जिसके बाद उनका निधन हो गया। एक साल पहले टीवी के सबसे फिट एक्टर्स में से एक सिद्धार्थ शुक्ल का भी हार्ट अटैक से निधन हो गया था. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर जिम जाने वाले फिटनेस फ्रीक लोगों को हार्ट अटैक क्यों हो रहा है। दिल्ली के एक सुप्रसिद्ध अस्पताल पीएसआरआई (PSRI) में सीनियर कंसल्टेंट एंड हेड ऑफ़ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डॉ.मनीष अग्रवाल का कहना है कि टीवी इंडस्ट्री के चमकते सितारे सिद्धार्थ शुक्ला की मौत और राजू श्रीवास्तव को जिम में हार्ट अटैक आने के बाद देश में लगातार कई तरह की बहस चल रही है। जिसमे ज़्यादातर लोग यही पूछ रहे हैं कि फिट होने के बाद भी हार्ट अटैक कैसे आ सकता है? इस लेख के ज़रिए डॉ.मनीष अग्रवाल बता रहे हैं कि फिट होने के बावजूद भी लोग हार्ट अटैक का शिकार क्यों हो रहे हैं।)
कैसे बचें : नोजवानो को जो हल्के व्यायाम न करके भारी वजन से व्यायाम करते हैं उनको कम से कम एक बार किसी हृदय चिकित्सक से अपने हृदय की जाँच जरूर करवानी चाहिए जिससे यदि कोई परेशानी हो तो समय से निदान उपचार हो सके, व् अचानक होने वाली बिमारियों से बचा जा सके.
कोशिश करें की प्राकर्तिक प्रोटीन और सप्लीमेंट्स के स्रोत का उपयोग करें, प्राकर्तिक पदार्थों के साइड इफ़ेक्ट न के बराबर होते हैं व् इनके अधिक इस्तेमाल से शरीर पर बुरा असर नहीं पड़ता।
अपनी परिवार के स्वास्थ्य पर तथा अपने माता पिता की स्वास्थ्य हिस्ट्री पर भी बारीक़ नजर डालें, कहीं उनको कोई अनुवांशिक रोग तो नहीं है, यदि है तो आप पर उन रोगों का आक्रमण हो सकता है समय से जाँच करा लें व् उससे बचने के उपाय खोजें या कम से कम चिकित्सक से सलाह जरूर लें.
It's essential for young individuals to undergo regular medical check-ups, especially if they have risk factors for heart disease, a family history of heart problems, or are planning to start an intense exercise regimen. Seeking medical advice before beginning a new exercise program and understanding individual cardiovascular health is crucial for preventing heart-related issues during physical activities.





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