मिथक: फलों का जूस लेने से शुगर बढ़ती है.
फैक्ट: 60 % हाँ, 40 %नहीं
हाँ: यदि फल मीठे हैं तो, अधिक मात्रा में या जूस लेने पर.
नहीं: सभी फल शुगर नहीं बढ़ाते, जूस के बजाय यदि पूरा फल खाया जय और थोड़ा थोड़ा खाया जय तो खून में शुगर का स्तर कंट्रोल रहता है. फल का सेवन करते समय रोटी, आलू और चावल (कार्बोहाइड्रेट-शुगर से भरपूर पदार्थ)आदि का प्रयोग न करें।
शुगर के पेशेंट द्वारा फलों का रस यदि अधिक मात्रा में लिया जाय तो खून में शुगर की मात्रा का बढ़ना स्वाभाविक है.
फलों का रस आसानी से व् तुरंत डाइजेस्ट हो कर खून में घुल जाता है इसलिए ये देखा गया है कि शुगर के पेशेंट यदि फलों का रस न ले कर, सिर्फ फलों को सीधे उपयोग करते हैं तो उनका शुगर लेवल धीरे धीरे व् प्राकर्तिक रूप से बढ़ता है. क्यों ?
- फल यदि पूरा खाया जाता है तो वह धीरे धीरे पचता है इसलिए खून में शर्करा या ग्लोकोस भी धीरे धीरे पहुँचता है
- फलों के रस के विपरीत, फलों को पचाने के लिए पाचन तंत्र को बहुत से पाचक रस बनाने पड़ते हैं इसलिए भी ये परीकिर्या धीरे धीरे व् प्राकर्तिक गति से होती है व् जरूरत के हिसाब से इसको धीमे ता तेज किया जा सकता है
- फलों का रस आसानी से टूट जाता है या पच जाता है और अपने अंदर मौजूद शुगर को तुरंत खून में पहुंचा देता है, इसलिए फलों का रस लेने पर खून में ग्लूकोस की मात्रा तुरंत बढ़ जाती है.
- फल यदि पूरा खाया जाता है तो ये ग्लूकोस के अतिरिक्त अपने साथ और बहुत से अन्य पदार्थ, जो की हमारी पाचन प्रणाली के लिए जरूरी होते हैं, ले कर आता है, इसमें सबसे जरूरी होता है फाइबर और अन्य पोषक तत्व, जो हमारे भोजन को हमारी आंतों में आसानी से आगे बढ़ने व् पचने में मदद करते हैं.
- इसके अतिरिक्त फलों में मौजूद एंटी ओक्सिडेंट्स हमारी त्वचा को जवान बनाए रखने में भी सहायक होते हैं. यदि फल अधिक मीठे हैं तो उसमें मौजूद शुगर या कार्बोहायड्रेट भी अधिक होता है, इसलिए शुगर (डाईबेटिक )से पीड़ित लोग फल के साथ साधारण खाना जिसमें रोटी या चावल की मात्रा अधिक होती है, न लें।
फलों के रस या पूरा फल खाते समय
क्या नहीं लेना चाहिए शुगर के मरीजों को :-
१. शुगर से पीड़ित को ज्यादा मीठे फल या तो नहीं लेने चाहिए या बहुत कम मात्रा में लेने चाहिए या धोड़ा -२ कर के लेना चाहिए जिससे उनके शरीर में एकसाथ बहुत सारा ग्लूकोस या चीनी न पहुंचे।
फलों का सेवन करते समय शुगर पीड़ित को रोटी, चावल, आलू या ऐसे पदार्थ नहीं लेने चाहिए (जिसमें कार्बोहाईड्रेट (शुगर) की मात्रा अधिक होती है ) व् अपने ब्लड शुगर लेवल का ध्यान रख कर ही किसी भी फल को लेना चाहिए।
हाँ यदि वे हरी सब्जियों का सेवन करते हैं तो ऐसा करने पर उनका ब्लड ग्लूकोस नहीं बढ़ेगा
२. शुगर के पेशेंट यदि कच्चा खाने योग्य फल या सब्जी का प्रयोग अधिक करें तो उनको इन फल सब्जियों से बहुत से ऐसे पदार्थ, जो शुगर को नियंत्रण में रखते हैं, प्राप्त हो जाएंगे, जो कि सामान्य रूप से उन सब्जियों को पकाने से ख़राब या ख़त्म हो जाते है
- बंद गोभी
- टमाटर
- पपीता
- ब्रोकली
- एस्पेरेगस या शतावरी
- चुकन्दर
मधुमेह वाले लोगों के लिए सबसे खराब फलों में आम, कटहल, केला, चिक्कू और अंगूर शामिल हैं। इन फलों में चीनी अधिक और फाइबर कम होता है।
और क्या करें ?
1. अपने डॉक्टर से सलाह करके अपने लिए भोजन चार्ट बनवाएं व् उसमें समय-२ पर मामूली बदलाव के साथ अपना भोजन लें. कभी -२ शुगर लेवल देखकर बहुत थोड़ी मात्रा में अपने मनपसंद के भोजन का भी सेवन करें जिससे आपकी इच्छा भी पूरी होती रहे.
२. इन्सुलिन पौधे के पत्तों का अपनी दवाइयों के साथ सेवन कर सकतें हैं (इन्सुलिन पौधे के बारे में बहुत सी अफवाहें हैं इसलिए सिर्फ इन्सुलिन पौधे से आपका शुगर लेवल नियंत्रण हो जायेगा जरुरी नहीं, हां, इन्सुलिन के पत्तों का दवाइयों के साथ इस्तेमाल से उसमें मदद जरूर मिल सकती है, लेकिन इसका असर हर एक व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।)
३. सुबह का नाश्ता शुगर फ्री फ्रूट से करें व् उसके साथ गेहूं,चावल,आलू से बनी वस्तुओं का प्रयोग न करें
४. जहाँ तक संभव हो सके कच्ची खाने लायक हरी सब्जिओं का सेवन करें कम मसालों का प्रयोग करें।
५. फलों के रस के बजाय पूरा फल खाने में लें
६. ज्वार बाजरे का सेवन बढ़ाएं
७. व्यायाम करना इन सबमें- सबसे जरुरी है, इसलिए अगर लम्बी आयु की इच्छा रखतें हैं तो रोजाना व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
इन्सुलिन प्लांट के पत्तों का इस्तेमाल करने से पहले, सुनिश्चित करें कि पौधा वास्तविक है (साइंटिफिक नाम Costus Ignous ).
काम की बात
व्यायाम क्यों है जरूरी ?
हमारे शरीर में हमारा भोजन पचने के बाद, पाचन तंत्र भोजन में मौजूद शुगर या ग्लूकोस को सीधा हमारे खून में पहुँचा देता है. उसके बाद जरूरत के हिसाब ये शर्करा या शुगर या ग्लूकोस हमारे शरीर के विभिन्न हिस्सों में बाँट दी जाती है, इस ग्लूकोस का बहुत बड़ा हिस्सा हमारी हाथों-पैरों की मांसपेशियों में पहुँचता है जहाँ इसे विभिन्न कामों में खर्च कर लिया जाता है. यदि हम एक ही जगह पर पड़े रहते है या ऐसा काम करते हैं जिसमें न के बराबर चलना-उठना-बैठना पड़े तब ये ग्लूकोस हमारे रक्त में ही बना रहता है और हमारा शरीर इसको मूत्र के साथ बाहर निकलने की कोशिश करता रहता है. यदि ये स्थिति लम्बे समय तक चलती रहे तो शुगर या मधुमेह की शिकायत में बदल जाती है
लेकिन इस आदत को यदि समय से बदल लिया जाय और अपनी दैनिक किर्याओं में यदि हल्का व्यायाम या टहलना घूमना फिरना शमिल कर लिया जाए तो मधुमेह से बचा भी जा सकता है या मधुमेह को नियंत्रण में रखा जा सकता है.



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